Nazar E Bad Se Bachne Ki Dua: घर और बच्चों को बुरी नज़र से कैसे बचाएं?

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मेरे अज़ीज़ भाइयो और बहनो, अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातहू।

Nazar E Bad Se Bachne Ki Dua:आज के इस डिजिटल और दिखावे के दौर में जहाँ हम अपनी ज़िन्दगी की हर छोटी-बड़ी कामयाबी, अपने बच्चों की प्यारी मुस्कुराहटें, अपनी नई गाड़ी, नया घर और अपने घर की खुशियां सोशल मीडिया के ज़रिए दुनिया के सामने ज़ाहिर करते हैं, वहीं हम अनजाने में एक बहुत बड़ी और ख़तरनाक चीज़ का शिकार हो जाते हैं—और वह है नज़र-ए-बद (बुरी नज़र)

​क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि घर का कोई सेहतमंद बच्चा, जो कल तक बिल्कुल ठीक खेल-कूद रहा था, वह अचानक ऐसी गंभीर बीमारी या बेचैनी का शिकार हो गया हो जिसे बड़े-बड़े डॉक्टर भी समझ न पा रहे हों? या फिर आपका अच्छा-ख़ासा चलता हुआ कारोबार अचानक रुक गया हो और आपको समझ ही न आ रहा हो कि ऐसा क्यों हो रहा है? जब इंसान ऐसी शदीद परेशानियों में घिर जाता है, तो अक्सर लोग परेशान होकर इंटरनेट पर सर्च करते हैं या उलमा-ए-कराम से पूछते हैं कि आखिर nazar kya hoti hai? (नज़र क्या होती है?) और घर व बच्चों को इससे कैसे महफूज़ रखा जाए।

​मेरे भाइयो और बहनो, अगर आपके या आपके घर वालों के साथ ऐसा कुछ हो रहा है, तो यह कोई इत्तेफ़ाक़ नहीं है। ये सब अलामात (symptoms) बुरी नज़र और हसद (jealousy) की हो सकती हैं। हसद और जलन लोगों के दिलों में पलने वाली वह ख़तरनाक बीमारी है जो किसी भी हंसते-खेलते घर को पल भर में तबाह कर सकती है। इस्लाम में नज़र का लगना एक अटल हक़ीक़त है, कोई वहम नहीं।

​लेकिन अल्हम्दुलिल्लाह, अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने हमें बेसहारा नहीं छोड़ा है। कुरान मजीद की पाक आयतों और नबी करीम ﷺ की सुन्नतों की रौशनी में हमारे पास ऐसी ताक़तवर दुआएं मौजूद हैं जो हमें एक मज़बूत ढाल की तरह महफूज़ रख सकती हैं। इसीलिए हमारे उलमा हमेशा ज़ोर देते हैं कि हमें पाबंदी के साथ Nazar E Bad Se Bachne Ki Dua पढ़ते रहना चाहिए, ताकि हम, हमारी औलाद और हमारा रिज़्क़ हमेशा महफूज़ रहे।

Table of Contents

​आज के इस ख़ास और मुकम्मल आर्टिकल में, हम आपको नज़र-ए-बद की हक़ीक़त, इसके ख़तरनाक लक्षण, और Nazar E Bad Se Bachne Ki Dua तफ़्सील से बताएंगे। इसे पूरा पढ़ें और अपने अज़ीज़ों तक भी पहुँचाएं।

​1. इस्लाम में नज़र-ए-बद की हक़ीक़त (Nazar Kya Hoti Hai?)

​कुछ लोग, ख़ासकर आज की नई नस्ल, बुरी नज़र को महज़ एक वहम, पुराना खयाल या अंधविश्वास समझती है। अगर आपके भी मन में यह सवाल है कि असल में nazar kya hoti hai?, तो एक मोमिन होने के नाते हमें यह अच्छी तरह जान लेना चाहिए कि इस्लाम में यह एक अटल हक़ीक़त है।

​नज़र दरअसल किसी इंसान की आंखों से निकलने वाली वह नकारात्मक (Negative) ऊर्जा या शदीद जलन है जो दूसरे को नुकसान पहुँचाती है । जब कोई शख्स किसी की नेमत (पैसा, सेहत, खूबसूरती या कामयाबी) को देखकर हसद करता है, तो उसके दिल की वह जलन एक शैतानी असर बनकर सामने वाले पर वार करती है।

​इसकी हक़ीक़त को साबित करने के लिए सहीह मुस्लिम की एक बहुत ही मशहूर और मोतबर हदीस शरीफ़ यहाँ दी जा रही है:

“नज़र का लगना हक़ (सच) है, और अगर कोई चीज़ तक़दीर पर सबक़त ले जाने वाली (तक़दीर को पीछे छोड़ने वाली) होती, तो वह बुरी नज़र होती।”

(सहीह मुस्लिम, हदीस 2188)

​मेरे अज़ीज़ दोस्तो, बुरी नज़र सिर्फ हमारे दुश्मनों या हमसे जलने वालों से ही नहीं लगती, बल्कि कभी-कभी यह हमारे अपनों की, हमारी अपनी औलाद को हमारी, या ख़ुद हमें अपनी भी लग सकती है! जब हम किसी बहुत अच्छी चीज़ को देखकर, या अपनी किसी कामयाबी को देखकर “माशाअल्लाह” (Mashallah) या “तबारकअल्लाह” (Tabarakallah) नहीं कहते, तो उस चीज़ पर नज़र लगने का अंदेशा कई गुना बढ़ जाता है। इसी खतरे को देखते हुए हमें अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में Nazar E Bad Se Bachne Ki Dua का एहतमाम करना चाहिए।

​2. बुरी नज़र और जादू के ख़तरनाक लक्षण (Nazar Lagne Ke Lakshan Aur Upay Hindi)

​किसी भी रूहानी बीमारी का इलाज करने से पहले उसे सही तरह पहचानना बहुत ज़रूरी है। बहुत से लोग यह समझ ही नहीं पाते कि उन्हें या उनके घर को नज़र लग चुकी है, और वह सिर्फ डॉक्टरों के चक्कर काटते रहते हैं। अगर आप buri nazar ki pehchan aur ilaj in hindi तलाश कर रहे हैं, तो नीचे दिए गए लक्षणों को ध्यान से पढ़ें।

​अगर आप या आपके घर का कोई भी फ़र्द इनमें से कुछ भी महसूस करता है, तो आपको फ़ौरन nazar lagne ke lakshan aur upay hindi के तहत हिफ़ाज़ती दुआओं का एहतमाम शुरू कर देना चाहिए:

​जिस्मानी अलामात (Physical Symptoms)

  • अचानक और बेतहाशा दर्द: बिना किसी मेडिकल वजह या बीमारी के तेज़ सिरदर्द रहना, या जिस्म के मुख़्तलिफ़ हिस्सों (ख़ासकर कन्धों और पीठ) में भारीपन महसूस होना। अगर जिस्मानी तकलीफ़ ज़्यादा हो और दवा काम न कर रही हो, तो आप हमारी वेबसाइट पर मौजूद हर बीमारी से शिफा की दुआ भी पाबंदी से पढ़ सकते हैं ।
  • बच्चों का लगातार रोना: छोटे बच्चों में अचानक, बिना किसी बीमारी के शदीद रोना और बेचैनी होना नज़र लगने की सबसे बड़ी अलामत है।
  • चेहरे का नूर ख़त्म होना: चेहरे का रंग अचानक पीला या बेनूर हो जाना। इंसान ऐसा लगने लगता है जैसे वह बरसों से बीमार हो।

​दिमागी और रूहानी अलामात (Mental and Spiritual Symptoms)

  • गुस्सा और चिड़चिड़ापन: छोटी-छोटी बातों पर शदीद गुस्सा आना और अपने ही बच्चों या बीवी/शौहर पर चीखना-चिल्लाना। अगर मियाँ-बीवी के रिश्ते में नज़र की वजह से दूरियां आ गई हैं, तो आप शौहर की मोहब्बत पाने की दुआ पढ़कर अपने रिश्ते को दोबारा मज़बूत कर सकते हैं।
  • इबादत में दिल न लगना: हमेशा मायूसी और डिप्रेशन (Depression) का शिकार रहना। नमाज़ पढ़ने का दिल न करना और सुस्ती छाए रहना।

​माली और घर की अलामात (Financial and Household Symptoms)

  • कारोबार में अचानक नुकसान: बहुत अच्छा चलते हुए कारोबार या दुकान में अचानक भारी नुकसान होना या कस्टमर्स का आना बिल्कुल बंद हो जाना। ऐसी हालत में नज़र का इलाज करने के साथ-साथ आपको karobar mein barkat ka wazifa hindi में ढूँढकर पढ़ना चाहिए ताकि माली हालात सुधर सकें।
  • रिज़्क़ और पैसों की तंगी: अगर घर में बेबरकती आ गई है तो आप हमारा क़र्ज़ उतारने की दुआ का आर्टिकल भी ज़रूर पढ़ें ।
  • घर में लड़ाई-झगड़े: घर के लोगों का आपस में बिना वजह उलझना और एक-दूसरे से शदीद नफ़रत करना, जबकि पहले सब बहुत प्यार से रहते थे।

​3. हर तरह की नज़र से हिफ़ाज़त की सबसे ताक़तवर दुआएं (Nazar E Bad Se Bachne Ki Dua)

​नीचे कुछ बेहतरीन, कुरानी और मुजर्रब (आज़माई हुई) दुआएं दी जा रही हैं। यह दुआएं किसी भी आमिल या बाबा के तावीज़ से हज़ार गुना ज़्यादा ताक़त रखती हैं।

​A. हर तरह के नुकसान और जादू से बचने की दुआ (Jadu Aur Nazar E Bad Se Bachne Ki Dua)

​यह दुआ बहुत ही मुक़द्दस है और हुज़ूर अकरम ﷺ अक्सर सुबह और शाम इसका एहतमाम किया करते थे। यह दुआ हर तरह की परेशानी, दुश्मनों के हसद और जादुई शक्तियों से एक लोहे की ढाल का काम करती है। जो लोग jadu aur nazar e bad se bachne ki dua या nazar se bachne ki dua ढूँढ रहे हैं, उनके लिए यह बेहतरीन है।

अरबी टेक्स्ट:

​بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ

हिंदी उच्चारण (Transliteration):

बिस्मिल्लाहिल-लज़ी ला यज़ुर्रु म-अस्मिही शै-उन फ़िल अरज़ि व-ला फ़िस-समा-इ व-हुवस-समीउल अलीम।

हिंदी तर्जुमा (Meaning):

​”अल्लाह के नाम से (मैं पनाह मांगता हूँ), जिसके नाम की बरकत से ज़मीन और आसमान की कोई भी चीज़ ज़र्रा बराबर नुकसान नहीं पहुँचा सकती, और वह सब कुछ सुनने वाला और (हर नीयत को) जानने वाला है।”

फ़ज़ीलत (Benefits): जो शख्स इस दुआ को सुबह 3 बार और शाम को 3 बार पूरे यक़ीन के साथ पढ़ लेता है, अल्लाह तआला उसे उस दिन और उस रात हर तरह की अचानक आने वाली आफ़त, बीमारी और बुरी नज़र से महफूज़ रखता है।

​B. बच्चों को बुरी नज़र से बचाने की मुजर्रब दुआ (Bacho Ko Nazar Se Bachne Ki Dua)

​छोटे बच्चे बहुत नाज़ुक होते हैं और उनकी मासूमियत व खूबसूरती की वजह से उन्हें नज़र बहुत जल्दी लग जाती है। हज़रत इब्ने अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी करीम ﷺ अपने नवासे हज़रत हसन और हज़रत हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) को बुरी नज़र से बचाने के लिए यह दुआ पढ़कर उन पर दम किया करते थे। यह bacho ko nazar se bachne ki dua सबसे मुस्तनद (Authentic) है।

अरबी टेक्स्ट:

​أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لَامَّةٍ

हिंदी उच्चारण (Transliteration):

अऊज़ु बि-कलिमातिल-लाहित-ताम्मति मिन कुल्लि शैतानिंव व-हाम्मतिंव व-मिन कुल्लि ऐनिल-लाम्माह।

हिंदी तर्जुमा (Meaning):

​”मैं अल्लाह के मुकम्मल कलिमों के ज़रिए पनाह मांगता हूँ हर शैतान से, हर ज़हरीले जानवर से, और हर नुकसान पहुँचाने वाली बुरी नज़र से।”

(सहीह बुख़ारी, हदीस 3371)

पढ़ने का तरीक़ा: माओं और बापों को चाहिए कि वह सुबह फ़जर के बाद और शाम को मगरिब के बाद इस दुआ को 3 बार पढ़ें और अपने बच्चों के माथे और सीने पर हल्की सी फूंक मार दें (दम कर दें)। बच्चों की हिफ़ाज़त के लिए Nazar E Bad Se Bachne Ki Dua के तौर पर इससे बेहतर कोई सुन्नत तरीक़ा नहीं है।

​4. कुरान-ए-पाक से बुरी नज़र उतारने का मुकम्मल तरीक़ा (Nazar Utarne Ka Wazifa)

​मेरे भाइयो और बहनो, बहुत अफ़सोस की बात है कि जब भी हमें कोई रूहानी परेशानी होती है या नज़र लगती है, तो हम अल्लाह के कलाम को छोड़कर जाली आमिलों, तावीज़ देने वालों और ढोंगी बाबाओं के पास भागते हैं। याद रखें, अल्लाह ने अपनी पाक किताब कुरान में हमारे लिए मुकम्मल शिफ़ा रखी है ।

​अगर आप घर बैठे nazar utarne ka wazifa करना चाहते हैं, तो आप रुक़्याह शरिया (Ruqyah Shariah) के ज़रिए अपना और अपने अज़ीज़ों का इलाज ख़ुद कर सकते हैं । यह nazar e bad khatam karne ka qurani amal सबसे बेहतरीन और सुन्नत तरीक़ा है।

​रुक़्याह करने का सही और सुन्नत तरीक़ा (Step-by-Step Guide):

​यह अमल बहुत आसान है और कोई भी पाकीज़ा मुसलमान इसे अपने घर में कर सकता है।

  1. बा-वज़ू होना: सबसे पहले साफ़-सुथरे कपड़े पहनें और अच्छी तरह ताज़ा वज़ू बना लें।
  2. पाक जगह का इंतख़ाब: घर की एक साफ़ और सुकून वाली जगह पर किबला रुख़ (काबा की तरफ़ मुँह करके) बैठ जाएं।
  3. पानी का गिलास: अपने सामने पीने के पानी का एक बड़ा गिलास या जग रख लें।
  4. दुरूद शरीफ़: अमल की शुरुआत में 3 या 11 मर्तबा दुरूद-ए-इब्राहिमी (जो हम नमाज़ में पढ़ते हैं) या दुरूद-ए-ताज पढ़ें।
  5. कुरानी आयतों की तिलावत: अब पूरे यक़ीन, तवज्जो और इस नीयत के साथ कि “अल्लाह ही शिफ़ा देने वाला है”, नीचे दी गई मुक़द्दस सूरतें पढ़ें:
  6. दम करना (फूंक मारना): पढ़ने के बाद अपने दोनों हाथों पर हल्की सी फूंक मारें और हाथों को अपने पूरे चेहरे, सिर, और जिस्म के जितने हिस्से तक हाथ पहुंच सके, फेर लें। उसके बाद सामने रखे पानी पर भी 3 बार दम कर दें।
  7. पानी का इस्तेमाल: इस दम किए हुए रूहानी पानी को उस इंसान को पिलाएं जिसे नज़र लगी हो या जो बीमार हो। अगर जादू या बेबरकती का असर घर की दीवारों में है, तो इस पानी की कुछ छींटे (Spray) घर के चारों कोनों में छिड़क दें।
  8. आख़िर में दुआ: आख़िर में दोबारा दुरूद शरीफ़ पढ़ें और अल्लाह के सामने हाथ फैलाकर शिफ़ा की दुआ मांगें। अगर बच्चों के इम्तिहान का वक़्त क़रीब है और उन्हें नज़र लग गई है, तो इसी पानी को पिलाने के साथ-साथ आप उन्हें imtihan mein kamyabi ki dua भी सिखा सकते हैं ताकि वह दिमागी तौर पर मज़बूत हों।

Chote bachcho ki nazar ki dua in hindi

​5. घर और बच्चों को नज़र-ए-बद से बचाने के लिए ज़रूरी एहतियात (Precautions)

​रूहानी दुआओं और वज़ाइफ़ के साथ-साथ हमारी अपनी रोज़मर्रा की आदतों में भी कुछ अहम बदलाव लाना बेहद ज़रूरी है। इस्लाम हमें सादगी, हया और पर्दादारी का हुक्म देता है।

  1. सोशल मीडिया पर शो-ऑफ़ (Show-off) से मुकम्मल परहेज़ करें: आजकल लोग Facebook, Instagram, या WhatsApp स्टेटस पर अपनी हर ख़ुशी, बच्चों की तस्वीरें, नया घर या अच्छा खाना खाने की तस्वीरें फ़ौरन शेयर कर देते हैं। आपकी फ्रेंड लिस्ट में मौजूद हर कोई आपको अच्छी नज़र से नहीं देखता। अपनी ख़ुशियों को पर्दे में रखना सीखें।
  2. “माशाअल्लाह” कहने की पक्की आदत डालें:
    जब भी किसी की अच्छी चीज़ देखें, चाहे वह कोई अजनबी हो या आपका अपना बच्चा ही क्यों न हो, फ़ौरन “माशाअल्लाह ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह” (MashAllah La Quwwata Illa Billah) कहें। यह अलफ़ाज़ सामने वाले की नेमत को आपकी अनजानी नज़र लगने से बचा लेते हैं।
  3. फर्ज़ नमाज़ों की पाबंदी:
    नमाज़ मोमिन का सबसे बड़ा हथियार है। जो इंसान पांच वक़्त की नमाज़ का पाबंद होता है, अल्लाह के फ़रिश्ते उसके आगे-पीछे रहकर उसकी हिफ़ाज़त करते हैं।
  4. काले धागे, नींबू-मिर्च या तावीज़ से परहेज़ (Beware of Shirk):
    नज़र से बचने के लिए बच्चों के गले या पैर में काले धागे बांधना, गाड़ियों के आगे नींबू-मिर्च लटकाना, या नीले मोतियों (Evil Eye amulets) का इस्तेमाल करना इस्लाम में शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को शरीक करना) के क़रीब है। हिफ़ाज़त किसी धागे या पत्थर में नहीं, बल्कि सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह की ज़ात और उसके पाक कलाम में है।

क्या किसी इंसान को अपनी ख़ुद की नज़र लग सकती है?

जी हाँ, बिल्कुल लग सकती है। जब कोई इंसान आइने में ख़ुद को संवरता हुआ देखकर या अपनी किसी बड़ी कामयाबी पर इतराता है और अल्लाह का शुक्र अदा नहीं करता, तो उसे ख़ुद अपनी भी नज़र लग जाती है।

क्या नज़र उतारने के लिए लाल मिर्च जलाना या नमक का सिर से वारना जायज़ है?

नहीं, लाल मिर्च जलाकर धुआं करना या नमक को सिर से वार कर फेंकना एक पुरानी रस्म है। इसका इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं है। सही तरीक़ा nazar e bad khatam karne ka qurani amal (रुक़्याह शरिया) ही है जो ऊपर बताया गया है।

शादी में लगातार आ रही रुकावट क्या नज़र की वजह से हो सकती है?

जी हाँ, कई बार हसद और बुरी नज़र की वजह से अच्छे रिश्ते टूट जाते हैं या शादी में बेवजह की ताख़ीर (देरी) होती है। ऐसी परेशानी में आप हिफ़ाज़त की दुआओं के साथ हमारी वेबसाइट पर मौजूद शादी जल्द होने की दुआ भी पाबंदी से पढ़ सकते है।

कितने दिनों तक पानी पर दम करके (रुक़्याह) पीना चाहिए?

इसका कोई मुक़र्रर वक़्त नहीं है। अमूमन 7, 11 या 21 दिन तक पाबंदी से यह अमल करने पर अल्लाह के फ़ज़ल से बेहतरीन नतीजे मिलते हैं और मरीज़ पूरी तरह से सेहतयाब हो जाता है।

​आख़िरी बात (Conclusion)

​मेरे अज़ीज़ भाइयो और बहनो, यह दुनिया एक इम्तिहान की जगह है जहाँ दुख, तकलीफ़, और आज़माइशें आती रहती हैं। बुरी नज़र और हसद लोगों के दिलों की ऐसी ख़तरनाक बीमारी है, जिससे बचना आज के दिखावे के वक़्त में बहुत ज़रूरी है। लेकिन हमें हमेशा यह पुख़्ता यक़ीन रखना चाहिए कि कायनात का कोई भी इंसान, कोई भी जिन्न, और कोई भी बड़े से बड़ा जादूगर अल्लाह सुब्हानहु व तआला की मर्ज़ी के बग़ैर हमें एक ज़र्रे के बराबर भी नुकसान नहीं पहुँचा सकता।

​अपनी सुबह और शाम की दुआओं की पाबंदी करें, अपने अल्लाह पर मुकम्मल तवक्कुल (भरोसा) रखें। जैसा कि हमने ऊपर तफ़्सील से बताया कि यह कितना ज़रूरी है कि हम Nazar E Bad Se Bachne Ki Dua पढ़ते रहें ताकि हम और हमारा परिवार महफूज़ रहे।

​अल्लाह सुब्हानहु व तआला से दिल से दुआ है कि वह हम सब को, हमारी औलाद को, हमारे घर वालों को, और हमारे हलाल रिज़्क़ को हर तरह की बुरी नज़र, जालिमान लोगों के हसद, और काले जादू के वार से अपने हिफ़्ज़-ओ-अमान में रखे। (आमीन या रब्बल आलमीन)।

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