Har Bimari Se Shifa Ki Dua: हर तरह की बीमारी और दर्द का रूहानी इलाज (Shifa Ki Dua Hindi Mein)

Har Bimari Se Shifa Ki Dua

​मेरे अज़ीज़ भाइयो और बहनो, अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातहू।

Har Bimari Se Shifa Ki Dua: ​इंसानी ज़िंदगी में सुख-दुख, सेहत और बीमारी एक आम हिस्सा हैं। कभी हम बिल्कुल तंदुरुस्त होते हैं और कभी अचानक कोई ऐसी गंभीर बीमारी या दर्द हमें घेर लेता है कि इंसान अंदर से टूट जाता है। जब कोई अपना बिस्तर पर बीमार पड़ा हो, दर्द से कराह रहा हो, या डॉक्टर भी जवाब दे चुके हों, तो इंसान को सिवाए अल्लाह की ज़ात के कोई दूसरा सहारा नज़र नहीं आता।

​क्या आपके घर में भी कोई ऐसा है जो लंबे अरसे से बीमार है? या आपके शरीर के किसी हिस्से में (जैसे सिर, पेट या जोड़ों में) ऐसा दर्द रहता है जो किसी भी दवा से ठीक नहीं हो रहा? मेरे भाइयो और बहनो, इस्लाम में बीमारी को कोई मनहूस चीज़ या सज़ा नहीं माना जाता। बल्कि हदीस शरीफ़ के मुताबिक़, बीमारी एक मोमिन (मुसलमान) के लिए उसके गुनाहों को मिटाने (Kaffara) और अल्लाह के क़रीब जाने का एक बहुत बड़ा ज़रिया है ।

​इस्लाम हमें जहाँ एक तरफ अच्छे डॉक्टरों से इलाज (Jismani Ilaj) करवाने का हुक्म देता है, वहीं दूसरी तरफ कुरान और हदीस के ज़रिए रूहानी इलाज की भी तालीम देता है । हमारे प्यारे नबी हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें हर छोटी-बड़ी बीमारी, दर्द और तकलीफ़ से निजात पाने के लिए ऐसी दुआएं सिखाई हैं जो सीधा अल्लाह के अर्श पर क़ुबूल होती हैं।

Table of Contents

​आज के इस तफ़्सीली आर्टिकल में हम आपको Har bimari se shifa ki dua in hindi और कुरान-ए-पाक से रूहानी इलाज का मुकम्मल तरीक़ा बताएंगे। इसे पूरे यक़ीन के साथ पढ़ें और अपने बीमार अज़ीज़ों तक ज़रूर पहुँचाएं।

​1. बीमारी अल्लाह की तरफ से एक आज़माइश

​किसी भी bimari se shifa ki dua को पढ़ने से पहले हमें यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आखिर एक नेक इंसान बीमार क्यों पड़ता है।

​अक्सर लोग बीमारी में मायूस होकर अल्लाह से शिकायत करने लगते हैं कि “ऐ अल्लाह, मैंने तो किसी का बुरा नहीं किया, फिर मुझे यह बीमारी क्यों दी?” मेरे अज़ीज़ दोस्तो, अल्लाह अपने जिस बंदे से जितनी मोहब्बत करता है, उसे उतनी ही बड़ी आज़माइश में डालता है।

​सहीह बुखारी की एक बहुत ही मशहूर हदीस है जिसमें रसूलल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“मुसलमान को जो भी थकान, बीमारी, फिक्र, रंज, या तकलीफ़ पहुँचती है, यहाँ तक कि अगर उसे एक कांटा भी चुभता है, तो अल्लाह उसके बदले उसके गुनाहों को माफ़ कर देता है।”

​इसलिए बीमारी में कभी भी घबराएं नहीं। सब्र करें और पूरे यक़ीन के साथ अल्लाह से shifa e kamila ki dua (मुकम्मल और हमेशा रहने वाली शिफा) मांगें। जो अल्लाह बीमारी दे सकता है, वही अल्लाह उस बीमारी को जड़ से ख़त्म करने की ताक़त भी रखता है।

​2. हर बीमारी से शिफा की सबसे ताक़तवर दुआ (Har Bimari Se Shifa Ki Dua)

​अगर कोई इंसान बहुत ज़्यादा बीमार है, उसे कोई बड़ा रोग (जैसे कैंसर, हार्ट की बीमारी या शदीद इन्फेक्शन) हो गया है, तो आप उसके पास बैठकर हदीस से साबित यह दुआ कसरत से पढ़ें। इसे har bimari se shifa ki dua allahu shafi भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें अल्लाह को ‘शाफ़ी’ (शिफा देने वाला) कहकर पुकारा गया है ।

​यह दुआ हुज़ूर अकरम ﷺ अपने बीमार सहाबा को देखने जाते वक़्त पढ़ा करते थे।

अरबी टेक्स्ट:

​اللَّهُمَّ رَبَّ النَّاسِ، أَذْهِبِ الْبَأْسَ، وَاشْفِ أَنْتَ الشَّافِي، لَا شِفَاءَ إِلَّا شِفَاؤُكَ، شِفَاءً لَا يُغَادِرُ سَقَمًا

हिंदी उच्चारण:

अल्लाहुम्मा रब्बन्नास, अज़्हिबिल बा’स, इश्फ़ि अंताश-शाफ़ी, ला शिफ़ा-अ इल्ला शिफ़ा-उका, शिफ़ा-अल्ला युग़ादिरु सक़मा।

हिंदी तर्जुमा:

​”ऐ अल्लाह! इंसानों के रब! इस तकलीफ़ (बीमारी) को दूर कर दे और शिफा अता फ़रमा। तू ही शिफा देने वाला है, तेरी शिफा के सिवा कोई शिफा नहीं। ऐसी शिफा अता कर जो किसी भी बीमारी को न छोड़े (यानी बीमारी को जड़ से ख़त्म कर दे)।”

(सहीह बुखारी, हदीस 5742; सहीह मुस्लिम, हदीस 2191)

shifa ki dua hindi mein

पढ़ने का तरीक़ा:

मरीज़ ख़ुद या घर का कोई भी पाक साफ़ इंसान इस दुआ को 3 या 7 मर्तबा पढ़कर मरीज़ के पूरे बदन पर फूंक मार दे (दम कर दे)। अगर आप किसी रिश्तेदार की इयादत (बीमार पुरसी) के लिए अस्पताल जाएं, तो वहां भी इस दुआ को ज़रूर पढ़ें। जो लोग shifa ki dua hindi mein तलाश कर रहे हैं, उनके लिए यह हदीस का सबसे बेहतरीन तोहफ़ा है।

​3. जिस्म के किसी ख़ास हिस्से या दर्द से शिफा की दुआ (Dua for Body Pain)

​कई बार ऐसा होता है कि पूरे शरीर के बजाय किसी एक ख़ास हिस्से में बहुत शदीद दर्द होता है। जैसे अचानक बहुत तेज़ सिरदर्द (Migraine), घुटनों का दर्द, या फिर pet dard se shifa ki dua तलाश करने की नौबत आ जाती है।

​नबी करीम ﷺ ने हज़रत उस्मान बिन अबुल आस (रज़ियल्लाहु अन्हु) को जिस्म के दर्द को दूर करने का एक बहुत ही रूहानी और आज़माया हुआ तरीक़ा बताया था । जब हज़रत उस्मान (रज़ि.) ने अपने बदन के एक बहुत पुराने दर्द की शिकायत अल्लाह के रसूल ﷺ से की, तो आपने उन्हें यह जिस्म के दर्द की दुआ सिखाई ।

अमल करने का तरीक़ा (Step-by-Step):

  1. ​अपने दायें हाथ (Right Hand) को जिस्म के उस हिस्से पर रखें जहाँ दर्द हो रहा है (चाहे वह सिर हो, पेट हो, या पैर हो) ।
  1. ​सबसे पहले 3 मर्तबा “बिस्मिल्लाह” (بِسْمِ اللَّهِ) पढ़ें ।
  1. ​उसके बाद अपना हाथ वहीं रखे हुए, यह दुआ 7 मर्तबा पढ़ें:

हिंदी उच्चारण:

अऊज़ु बिल्लाहि व कुद्रतिही मिन शर्रि मा अजिदु व उहाज़िरु।

हिंदी तर्जुमा:

​”मैं अल्लाह की ज़ात और उसकी क़ुदरत की पनाह मांगता हूँ हर उस बुराई (और तकलीफ़) से जिसे मैं महसूस कर रहा हूँ और जिससे मैं डरता हूँ।”

(सहीह मुस्लिम, हदीस 2202)

​जो भाई-बहन अक्सर दर्द की वजह से दवाइयां खाते रहते हैं, उन्हें dard sy shifa ki dua के तौर पर इस सुन्नत तरीक़े को ज़रूर अपनाना चाहिए। अल्लाह के फ़ज़ल से दर्द फौरन गायब हो जाता है।

​4. तेज़ बुख़ार उतारने की सुन्नत दुआ (Bukhar Se Shifa Ki Dua)

​बुख़ार (Fever) जिस्म को बहुत कमज़ोर कर देता है। हदीस में आता है कि बुख़ार जहन्नम की भाप का एक हिस्सा है, इसलिए इसे पानी से ठंडा किया करो।

​अगर बच्चों को या घर के किसी बड़े को तेज़ बुख़ार आ गया हो, तो ठंडे पानी की पट्टियां सिर पर रखने के साथ-साथ यह bukhar se shifa ki dua कसरत से पढ़नी चाहिए:

दुआ:

बिस्मिल्लाहिल कबीर, अऊज़ु बिल्लाहिल अज़ीम, मिन शर्रि कुल्लि अर्क़िन न-आर, व मिन शर्रि हर्रिन नार।

तर्जुमा:

​”मैं अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ जो सबसे बड़ा है, और मैं अज़मत वाले अल्लाह की पनाह मांगता हूँ हर भड़कने वाली रग के शर से, और आग (जहन्नम) की गर्मी के शर से।”

तरीक़ा: इस दुआ को पढ़कर पानी पर दम करें और वह पानी मरीज़ को थोड़ी-थोड़ी देर में पिलाते रहें। इंशाल्लाह बुख़ार की गर्मी अल्लाह की रहमत से ठंडी पड़ जाएगी।

​5. कुरान-ए-पाक से रूहानी इलाज (Quranic Healing for Health)

​मेरे भाइयो और बहनो, अल्लाह तआला ने कुरान मजीद में साफ़ तौर पर फ़रमाया है:

“और हम कुरान में वह चीज़ नाज़िल करते हैं जो मोमिनों के लिए शिफा और रहमत है।” (सूरह अल-इसरा, आयत 82)

​अगर आपको शक है कि आपकी बीमारी की वजह कोई मेडिकल कंडीशन नहीं बल्कि किसी की बुरी नज़र या जादू है, तो आपको नज़र-ए-बद से बचने की दुआ के साथ-साथ कुरान की इन सूरतों को अपना हथियार बनाना चाहिए :

  • सूरह अल-फ़ातिहा (अल्हम्दु शरीफ़): इस सूरह का एक नाम ही ‘अश-शिफ़ा’ (शिफा देने वाली) है । किसी भी तरह की बीमारी या बेचैनी में 7 मर्तबा सूरह फ़ातिहा पढ़कर पानी पर दम करें और मरीज़ को पिलाएं। इसे bimari ka roohani ilaj में सबसे अफ़ज़ल माना गया है।
  • चार क़ुल (4 Qul): सूरह अल-काफ़िरून, सूरह इख़लास, सूरह अल-फ़लक़ और सूरह अन-नास। रात को सोते वक़्त हुज़ूर ﷺ इन सूरतों को अपने हाथों पर पढ़कर अपने पूरे जिस्म पर फेर लिया करते थे । यह हर तरह की अंदरूनी बीमारी, घबराहट और शैतानी वसवसों को जिस्म से निकाल फेंकने की ताक़त रखते हैं।

​6. शिफा के लिए 3 ज़रूरी सुन्नतें और एहतियात (Islamic Etiquettes of Healing)

​रूहानी दुआओं का असर तब कई गुना बढ़ जाता है जब हम इस्लाम के बुनियादी उसूलों और सुन्नतों पर पूरी तरह से अमल करते हैं। कोई भी Har bimari se shifa ki dua in hindi पढ़ने के साथ-साथ इन 3 बातों का ख़ास ख्याल रखें:

  1. मेडिकल इलाज (Jismani Ilaj) ज़रूर करवाएं: कुछ लोग सोचते हैं कि हम सिर्फ दुआ पढ़ेंगे और डॉक्टर के पास नहीं जाएंगे। यह इस्लाम की तालीम नहीं है। नबी करीम ﷺ ने ख़ुद भी बीमार होने पर दवा का इस्तेमाल किया और अपनी उम्मत को भी हुक्म दिया कि “ऐ अल्लाह के बंदो! अपना इलाज करवाओ, क्योंकि अल्लाह ने कोई ऐसी बीमारी नहीं उतारी जिसकी दवा पैदा न की हो।” रूहानी इलाज और जिस्मानी इलाज (दवा) दोनों एक साथ चलने चाहिए ।
  1. बीमार के नाम से सदक़ा दें: हदीस में आता है कि “अपने बीमारों का इलाज सदक़े (Charity) से करो।” जब घर में कोई बीमार हो, तो उसकी तरफ से गरीबों को खाना खिलाएं या कुछ पैसे अल्लाह के रास्ते में दें। सदक़ा अल्लाह के गुस्से को ठंडा करता है और हर तरह की आने वाली बला को टाल देता है।
  2. हलाल रिज़्क़ और पाकीज़गी: दुआ उसी की क़ुबूल होती है जिसका खाना-पीना और पहनना 100% हलाल कमाई का हो । हराम रिज़्क़ से पाले गए जिस्म में पढ़ी गई दुआओं में बरकत नहीं होती। इसके अलावा, मरीज़ के आस-पास का माहौल साफ़-सुथरा (Pak) और खुशबूदार रखें, ताकि वहां रहमत के फ़रिश्ते आ सकें।

​7. अक़्सर पूछे जाने वाले सवालात (

​बीमारी, शिफा और रूहानी दुआओं को लेकर बहुत से लोगों के ज़ेहन में सवाल होते हैं। यहाँ हमने कुछ अहम सवालों के जवाब दिए हैं:

क्या ‘Har bimari se shifa ki dua in hindi’ पढ़ कर हम कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों का इलाज कर सकते हैं?

जी हाँ, बिल्कुल! कुरान और हदीस की दुआएं हर बीमारी के लिए हैं, चाहे वह छोटा सिरदर्द हो या कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी। लेकिन याद रखें, आपको इसके साथ-साथ अच्छे डॉक्टर से पूरा मेडिकल ट्रीटमेंट भी करवाना है। दवा के साथ जब दुआ (रूहानी इलाज) मिलेगी, तो शिफा अल्लाह ज़रूर देगा।

अगर कोई ऐसा मरीज़ है जो ख़ुद दुआ नहीं पढ़ सकता (जैसे कोमा में हो या बच्चा हो), तो क्या करें?

अगर मरीज़ ख़ुद दुआ नहीं पढ़ सकता, तो उसकी माँ, बाप, बीवी/शौहर या कोई भी अज़ीज़ बा-वज़ू होकर ऊपर बताई गई shifa e kamila ki dua पढ़ कर मरीज़ पर फूंक मार सकता है। इसके अलावा पीने के पानी या दवाइयों पर भी दुआएं पढ़ कर दम किया जा सकता है।

क्या नमाज़ न पढ़ने वाले की दुआ क़ुबूल होती है?

नमाज़ मोमिन की सबसे बड़ी पहचान है। जो इंसान सेहतमंद होते हुए नमाज़ नहीं पढ़ता और सिर्फ बीमारी में अल्लाह को याद करता है, तो यह अच्छी बात नहीं है। हालाँकि अल्लाह बहुत रहीम है, वह सबकी सुनता है, लेकिन dua shifa ki fazilat और उसका मुकम्मल असर पाने के लिए पांच वक़्त की नमाज़ की पाबंदी शर्त है।

मुझे हर वक़्त बदन में सुस्ती और भारीपन रहता है, कोई दवा काम नहीं कर रही, मैं क्या करूँ?

अगर मेडिकल रिपोर्ट सब नॉर्मल हैं और फिर भी दर्द और सुस्ती है, तो यह नज़र-ए-बद या हसद का असर हो सकता है। आप सुबह-शाम सूरह फ़ातिहा और सूरह फ़लक़/नास पढ़कर अपने ऊपर दम करें और jism ke dard ki dua in hindi जो ऊपर हदीस के हवाले से बताई गई है, उसे दर्द की जगह हाथ रखकर पढ़ें।

​आख़िरी बात

​मेरे अज़ीज़ भाइयो और बहनो, बीमारी और सेहत, ज़िंदगी और मौत, यह सब सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह सुब्हानहु व तआला के हाथ में है। दुनिया का बड़े से बड़ा डॉक्टर सिर्फ़ दवा दे सकता है, लेकिन उस दवा में ‘शिफा’ डालने वाला मेरा और आपका रब ही है।

​अगर आप या आपका कोई अज़ीज़ इस वक़्त किसी भी जिस्मानी या दिमागी बीमारी से जूझ रहा है, तो बिल्कुल भी हिम्मत न हारें। अल्लाह की रहमत से कभी मायूस न हों। अपनी नमाज़ों में रो-रो कर अल्लाह से माफ़ी मांगें और ऊपर बताई गई Har bimari se shifa ki dua in hindi को अपने रोज़मर्रा के मामूल (Routine) का हिस्सा बना लें।

​अल्लाह सुब्हानहु व तआला से दिल से दुआ है कि वह इस दुनिया में जितने भी मुसलमान बीमार हैं, चाहे वो घरों में हों या अस्पतालों में, उन सबको शिफा-ए-कामिला और आजिला (मुकम्मल और जल्द मिलने वाली शिफा) अता फ़रमाए। अल्लाह हमारे बच्चों और बुजुर्गों को हर तरह की महामारी, दर्द, नज़र-ए-बद और मोहताजी से महफूज़ रखे। (आमीन या रब्बल आलमीन)।

​अगर आपको यह bimari se shifa ki dua और रूहानी इलाज की मालूमात मुफीद लगी हो, तो इसे अपने WhatsApp ग्रुप्स और Facebook पर उन रिश्तेदारों के साथ ज़रूर शेयर करें जो बीमारी की हालत में हैं। क्या पता आपके एक शेयर से किसी तड़पते हुए मरीज़ को सुकून मिल जाए और यह आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए। जज़ाकल्लाह ख़ैर।

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