La ilaha illallah wahdahu full dua in hindi: अस्सलाम वालेकुम प्यारे इस्लामी भाइयों और बहनों!

क्या अक्सर रात के किसी पहर अचानक आपकी आँख खुल जाती है? कई बार हम करवटें बदलते हैं, पानी पीते हैं या अपना मोबाइल चेक करने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस्लाम में इस वक़्त के लिए एक बेहद ख़ास और ताक़तवर दुआ बताई गई है?
अक्सर लोगों के ज़हन में यह सवाल आता है कि nind khulne par kya padhe या achanak nind khulne par kaun si dua padhte hai? अगर आप भी इंटरनेट पर इसी सवाल का जवाब ढूँढ रहे हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह आए हैं।
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आज हम आपको वो अज़ीम दुआ बताने जा रहे हैं, जिसे पढ़ने के बाद आप अल्लाह से जो भी माँगेंगे, वो ज़रूर क़ुबूल होगा।
रात को नींद खुलने की दुआ (Raat Ko Neend Khulne Ki Dua)
बहुत से लोग इस दुआ को इसके शुरुआती अलफ़ाज़ यानी La ilaha illallah wahdahu full dua in hindi के नाम से सर्च करते हैं। वहीं कुछ लोग इसे la ilaha illallah wali dua in hindi या subahan Allahi wali dua full in hindi कहकर भी ढूँढते हैं, क्योंकि इसमें अल्लाह की पाकी और तारीफ़ बयान की गई है।

नीचे इस पूरी दुआ का अरबी मतन, इंग्लिश ट्रांसलिटरेशन और हिंदी उच्चारण दिया गया है:
मुकम्मल दुआ (Arabic, English Transliteration & Hindi)
अरबी (Arabic): > لا إله إلا الله وحده لا شريك له، له الملك وله الحمد، وهو على كل شيء قدير. الحمد لله، وسبحان الله، ولا إله إلا الله، والله أكبر، ولا حول ولا قوة إلا بالله
English: > La ilaha illallah wahdahu la sharika lahu, lahul-mulku wa lahul-hamd, wa Huwa ‘ala kulli shay’in Qadir. subhan-Allahi, wa Alhamdulillahi wa la ilaha illallahu, wallahu akbar, wa la hawla wa la quwwata illa billah.
हिंदी: > ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्द, व हुव अला कुल्लि शै’इन क़दीर।, सुबहान-अल्लाही, व अल्हम्दुलिल्लाही व ला इलाहा इल्लल्लाहु, वल्लाहु अकबर, व ला हौला व ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह।
इसके फ़ौरन बाद आपको यह पढ़ना है:
अरबी: اللهم اغفر لي
English: Allahummaghfirli (या आप अपनी ज़ुबान में कोई भी दुआ माँग सकते हैं)।
हिंदी: अल्लाहुम्मग़फ़िरली।
दुआ का तर्जुमा (Meaning in Hindi)
इस दुआ का मतलब जानना भी बहुत ज़रूरी है ताकि आप इसे पूरे यक़ीन के साथ पढ़ सकें:
“अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वो अकेला है, उसका कोई साझी (शरीक) नहीं। बादशाही उसी की है और तमाम तारीफ़ें भी उसी के लिए हैं, और वो हर चीज़ पर पूरी क़ुदरत रखता है। तमाम तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं। अल्लाह की ज़ात पाक है, अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह की मदद के बग़ैर न किसी को गुनाहों से बचने की ताक़त है और न नेकी करने की हिम्मत। ऐ अल्लाह! मुझे माफ़ फ़रमा दे।”
(हवाला / Reference: नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया कि जो शख़्स रात को बेदार होकर यह दुआ पढ़े और फिर मग़फ़िरत माँगे या कोई भी दुआ करे, तो उसकी दुआ क़ुबूल होती है। और अगर वो वुज़ू करके नमाज़ पढ़े, तो उसकी नमाज़ भी मक़बूल होती है। – Sahih Bukhari, Hadith No. 1154)
इस दुआ को याद करने का आसान तरीक़ा
जैसा कि आपने देखा, इस दुआ के दूसरे हिस्से में Subhan-Allahi Alhamdulillahi dua in hindi के अलफ़ाज़ आते हैं। यह दरअसल वही कलिमे और तस्बीहात हैं जो हम रोज़ाना नमाज़ के बाद पढ़ते हैं।
इसे याद करने के लिए:
- पहला हिस्सा: चौथा कलमा है (ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू…), जो अक्सर मुसलमानों को याद होता है।
- दूसरा हिस्सा: अल्लाह की तारीफ़ है (अल्हम्दुलिल्लाह, सुभान-अल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह, अल्लाहु अकबर)।
- तीसरा हिस्सा: तीसरा कलमा का आख़िरी हिस्सा है (ला हौला व ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह)।
इन तीनों को मिलाकर यह एक मुकम्मल और बेहद ताक़तवर [हाजत पूरी होने की दुआ – Internal Link] बन जाती है।
अचानक नींद खुलने पर इस वज़ीफ़े के 3 बड़े फ़ायदे
जब आप नींद से उठकर दुनियावी ख्यालों में खोने के बजाय सबसे पहले अल्लाह को याद करते हैं, तो आपको यह फ़ायदे मिलते हैं:
- हर दुआ की क़ुबूलियत: इस दुआ को पढ़ने के बाद आप अपने हक़ में, अपने परिवार के लिए या अपनी रोज़ी-रोटी के लिए जो भी [क़ुबूलियत की दुआ] माँगेंगे, अल्लाह उसे रद्द नहीं करेगा।
- गुनाहों से पाकी: ‘अल्लाहुम्मग़फ़िरली’ पढ़ने से अल्लाह ताला आपके सारे सगीरा (छोटे) गुनाह माफ़ फ़रमा देता है।
- तहज्जुद का दोगुना सवाब: अगर इस दुआ को पढ़ने के बाद आप हिम्मत करके वुज़ू कर लें और 2 रकात नमाज़ पढ़ लें, तो वह अल्लाह के नज़दीक यक़ीनी तौर पर क़ुबूल हो जाती है।
(मज़ीद पढ़ें: [तहज्जुद की नमाज़ का सही तरीक़ा और रकात – Internal Link])
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सवाल: अगर मुझे पूरी दुआ अरबी में याद न हो तो क्या करूँ?
जवाब: आप इसे कागज़ पर लिखकर अपने बिस्तर के पास रख सकते हैं। जब तक याद न हो, आप इसे देखकर पढ़ लें। अल्लाह नियतों को देखने वाला है।
सवाल: क्या यह दुआ नापाकी की हालत में पढ़ सकते हैं?
जवाब: हाँ, ज़िक्र और अज़कार नापाकी की हालत में भी ज़ुबानी पढ़े जा सकते हैं। लेकिन नमाज़ पढ़ने के लिए ग़ुस्ल और वुज़ू शर्त है।
सवाल: क्या ये दुआ हदीस में आई है?
जी हां, Rat me Achanak Nind Khulne Par Padhi Jane Wali Dua का ज़िक्र सही बुखारी की हदीस नंबर 1154 में आया है।
निष्कर्ष (Conclusion):
अल्लाह ताला बहुत मेहरबान है जो रात के सन्नाटे में भी हमारी आवाज़ सुनता है। अब से जब भी आपकी आँख खुले, तो nind khulne par kya padhe सोचने के बजाय फ़ौरन इस अज़ीम दुआ को अपनी ज़ुबान पर ले आएँ।
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