शादी जल्द होने के लिए असरदार दुआ हिंदी में: मुकम्मल कुरआनी वजीफा

अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहु,

​मेरे अज़ीज़ भाइयो और बहनो मैं उम्मीद करता हूँ कि आप सब खैरियत से होंगे। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से दुआ है कि वो आपकी तमाम जायज़ तमन्नाओं को पूरा फरमाए और आपके नसीब अच्छे करे। आमीन।

pasand ki shadi ka Asan wazifa in hindi

अक्सर मेरे पास वालदैन (माता-पिता) और नौजवान लड़के-लड़कियाँ इस फिक्र के साथ आते हैं कि “हमारी शादी की उम्र हो गई है, लेकिन कोई मुनासिब रिश्ता नहीं आ रहा” या “बात बनते-बनते बिगड़ जाती है।” यह एक ऐसी परेशानी है जो पूरे परिवार को मुतास्सिर (प्रभावित) करती है।

​मेरे इल्म और तजुर्बे में, मैंने देखा है कि लोग इस मसले के हल के लिए कई दुनियावी कोशिशें करते हैं, जो ज़रूरी भी हैं, लेकिन अपनी रूहानी कोशिश (यानी अल्लाह से मदद) में कमी कर देते हैं। निकाह (शादी) न सिर्फ एक ज़रूरत है, बल्कि हमारे नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की एक बहुत प्यारी सुन्नत है।

​इस दुनिया में कोई भी मुश्किल ऐसी नहीं है जिसका हल अल्लाह ने क़ुरान-ए-पाक में न दिया हो। बस ज़रूरत है सही तरीके से, पूरे यकीन-ए-कामिल (पक्के भरोसे) के साथ उससे मांगने की।

​आज इस पोस्ट में, मैं आपको शादी जल्द होने के लिए असरदार दुआ हिंदी में और कुछ ऐसे मुजर्रब (आज़माए हुए) वजीफे बताऊँगा, जो क़ुरान और सुन्नत की रोशनी में हैं। हम बात करेंगे कि रिश्ते जमाने और शादी जल्दी होने के लिए दुआ कैसे करें और वो कौन से आमाल हैं जो आपकी राह की रुकावटों को दूर कर सकते हैं।

वजीफा या दुआ का सही मतलब क्या है?

​सबसे पहले ये समझना ज़रूरी है कि “वजीफा” कोई जादू-टोना नहीं है। वजीफा का मतलब है अल्लाह के पाक नामों या क़ुरान की आयतों को एक खास तरतीब और तादाद (गिनती) में पढ़कर अल्लाह से मदद मांगना। ये इबादत का ही एक हिस्सा है।

​इस्लाम में निकाह को आधा ईमान कहा गया है। यह एक ऐसा पाक रिश्ता है जो इंसान को गुनाहों से बचाता है। लेकिन जब इस पाक रिश्ते में देर होती है, तो कई वजहें हो सकती हैं:

  1. अल्लाह की तरफ से आज़माइश: कभी-कभी अल्लाह हमें आज़माता है कि हम मुश्किल में उसे कितना याद करते हैं।
  2. नज़र-ए-बद या रुकावटें: कभी हसद (जलन) या दूसरी रूहानी रुकावटें भी रिश्ता बनने नहीं देतीं।
  3. हमारी अपनी ग़लतियाँ: हो सकता है हम अपनी दुनियावी कोशिशों में इतने मशगूल हों कि अल्लाह से उस तरह नहीं मांग रहे जैसा मांगने का हक़ है।

​यहाँ हम जो शादी के लिए Quranic वजीफा और उसकी विधि बताएँगे, वो इन्हीं सब परेशानियों का रूहानी इलाज है। इसमें हम क़ुरान-ए-पाक की उन आयतों का सहारा लेंगे जिनमें अल्लाह ने खुद हमें दुआ करना सिखाया है।

किसी भी वजीफे को शुरू करने से पहले कुछ बुनियादी बातों का ख्याल रखना निहायत ज़रूरी है, वरना वजीफे का असर ज़ाहिर नहीं होता।

वजीफे की बुनियादी शर्तें:

  • नियत का साफ होना: आपका मकसद सिर्फ एक नेक और जायज़ रिश्ता होना चाहिए।
  • पाँच वक्त की नमाज़: कोशिश करें कि पाँचों वक्त की नमाज़ की पाबंदी हो, क्यूँकि नमाज़ ही हर मुश्किल की कुंजी है।
  • पाकीज़गी (सफाई): वजीफा हमेशा वुज़ू की हालत में, पाक साफ जगह पर बैठकर पढ़ें।
  • यकीन-ए-कामिल: दिल में ज़रा भी शक न हो। पूरा भरोसा हो कि अल्लाह आपकी दुआ ज़रूर कबूल करेगा।
  • दुरूद शरीफ: किसी भी वजीफे या दुआ के शुरू और आखिर में दुरूद शरीफ (खासतौर पर दुरूद-ए-इब्राहीम) लाज़मी पढ़ें। दुरूद शरीफ के बगैर दुआ ज़मीन और आसमान के बीच रुकी रहती है। कुछ उलमा दुरूद-ए-ताज की भी सलाह देते हैं क्योंकि इसकी फजीलत बहुत ज़्यादा है।

शादी के लिए दुआ

शादी जल्द होने के लिए 5 असरदार वजीफा हिंदी में

चलिए तो अब हम आपको शादी जल्द होने के लिए असरदार दुआ हिंदी में में बताते है।

वजीफा 1: सूरह यासीन (Yaseen) का अमल (40 दिन)

​सूरह यासीन को क़ुरान का दिल कहा गया है। यह शादी के लिए रोजाना 40 दिन करने वाला वजीफा है और बेहद असरदार है।

  • तरीका: फज्र की नमाज़ के बाद या इशा की नमाज़ के बाद इस अमल को करें।
  • अव्वल-आखिर 11-11 मर्तबा दुरूद शरीफ पढ़ें।
  • सूरह यासीन (क़ुरान का 36वां सूरह) को एक बार मुकम्मल (पूरा) पढ़ें।
  • ​पढ़ने के बाद अल्लाह के हुज़ूर रो-रोकर, गिड़गिड़ाकर अपनी शादी और एक नेक जीवनसाथी के लिए दुआ करें।
  • मुद्दत (Duration): यह अमल 40 दिन तक बिना नागा (बिना छोड़े) करना है। (खवातीन/लड़कियाँ अपने खास दिनों में इसे छोड़ दें और बाद में गिनती पूरी करें)। यह जल्द सगाई और शादी के लिए तिलावत का बेहतरीन तरीका है।

वजीफा 2: हज़रत मूसा (अ.) की दुआ (रिश्ता न बनने पर)

​यह क़ुरान की वो पाक दुआ है जो हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उस वक्त मांगी थी जब वो बिलकुल तन्हा और बे-आसरा थे। यह रिश्ता न बनने पर सबसे कारगर दुआ मानी जाती है।

  • दुआ (सूरह क़सस, आयत 24): ​رَبِّ إِنِّي لِمَا أَنزَلْتَ إِلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَقِيرٌ (रब्बी इन्नी लिमा अंज़लता इलय्या मिन खैरिन फकीर) तर्जुमा: “ऐ मेरे रब! जो भी खैर (भलाई) तू मुझ पर नाज़िल करे, मैं उसका मोहताज हूँ।”
  • तरीका: इस आयत को अपनी रोज़ की दुआओं में शामिल करें। बेहतर है कि हर नमाज़ के बाद 101 मर्तबा (या जितना आसानी से हो सके) पढ़ें और अल्लाह से ‘खैर’ (भलाई) मांगें, जिसमें एक नेक रिश्ता भी शामिल है।

वजीफा 3: लड़की की शादी के लिए खास अमल (सूरह ताहा)

​अक्सर तजुर्बे में आया है कि लड़की की शादी के लिए दुआ और वजीफा के तौर पर सूरह ताहा (क़ुरान का 20वां सूरह) बहुत फायदेमंद है।

  • तरीका: लड़की खुद या उसकी वालिदा (माँ) रोज़ाना सूरह ताहा की तिलावत करें।
  • ​इसके अलावा, सूरह ताहा की आयत नंबर 131-132 को हर नमाज़ के बाद 11 मर्तबा पढ़कर खुद पर दम करें (फूँक मारें)।
  • ​यह अमल शादी में दिक्कतों को दूर करने वाली दुआ के तौर पर भी जाना जाता है, खासकर अगर किसी ने बंदिश या रुकावट कर दी हो।

वजीफा 4: लड़के की शादी के लिए इस्लामिक दुआ और उपाय

​अगर लड़के के रिश्ते में देर हो रही हो, तो लड़के की शादी के लिए इस्लामिक दुआ और उपाय के तौर पर सूरह युसूफ (क़ुरान का 12वां सूरह) की तिलावत करना बहुत मुफीद है।

  • तरीका: लड़का खुद रोज़ाना सूरह युसूफ की तिलावत करे। अल्लाह ने इस सूरह में हज़रत युसूफ (अ.) को हुस्न (खूबसूरती) और इल्म अता किया था। इसकी तिलावत से लड़के के चेहरे पर नूर और शख्सियत में कशिश (अट्रैक्शन) पैदा होती है और अच्छे रिश्ते आने लगते हैं।
  • ​साथ ही ऊपर बताई गई “रब्बी इन्नी लिमा…” वाली दुआ (वजीफा 2) भी कसरत से पढ़ें।

वजीफा 5: शादी के लिए Parents को मनाने का वजीफा

​कभी-कभी रिश्ता तो होता है लेकिन वालदैन (माता-पिता) किसी वजह से राज़ी नहीं होते। ऐसी सूरत में शादी के लिए Parents को मनाने का वजीफा ये है:

  • तरीका: इशा की नमाज़ के बाद जब सब सो जाएँ, तो वुज़ू करके 2 रकात नमाज़ (सलातुल हाजत) पढ़ें।
  • ​इसके बाद 11 मर्तबा दुरूद शरीफ।
  • ​फिर 300 मर्तबा “या लतीफ़ु” (يَا لَطِيفُ) पढ़ें। (ऐ नरमी करने वाले)
  • ​आखिर में 11 मर्तबा दुरूद शरीफ।
  • ​इसके बाद अल्लाह से दुआ करें कि वो आपके वालदैन के दिल में आपकी जायज़ मोहब्बत के लिए नरमी पैदा कर दे और उन्हें राज़ी कर दे। यह अमल कम से कम 21 दिन करें।

मेरे तजुर्बे में, लोग वजीफा करते हैं पर असर नहीं होता, क्यूंकि वो कुछ आम ग़लतियाँ कर बैठते हैं:

  1. जल्दबाज़ी करना: लोग चाहते हैं कि आज वजीफा किया और कल काम हो जाए। सब्र (Patience) बहुत ज़रूरी है। शादी के लिए 7 दिन में असर दिखाने वाला वजीफा जैसी चीज़ों के पीछे न भागें। रूहानी आमाल में वक्त लगता है।
  2. यकीन की कमी: “पता नहीं होगा या नहीं,” यह सोच ही वजीफे का असर ख़त्म कर देती है।
  3. गुनाहों को न छोड़ना: एक तरफ आप वजीफा कर रहे हैं और दूसरी तरफ नमाज़ छोड़ रहे हैं, या हराम काम (जैसे म्यूजिक, गैर-महरम से बात) कर रहे हैं, तो दुआ कैसे कबूल होगी?
  4. दुनियावी कोशिश न करना: वजीफे का मतलब ये नहीं कि आप घर बैठ जाएँ। रिश्ते ढूँढना, लोगों से मिलना (जायज़ तरीके से) भी सुन्नत है। दुआ और दवा, दोनों ज़रूरी हैं।
  5. बिना परेशानी के शादी की दुआ कैसे करें? इसका सबसे आसान तरीका “इस्तिग़फार” (अस्तग़फिरुल्लाह) की कसरत है। जब आप अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं, तो अल्लाह आपके लिए बंद रास्ते खोल देता है।

​अगर आपको अपनी कोशिशों में सफलता के लिए दुआ चाहिए, तो पहले अल्लाह से अपने ताल्लुक को मजबूत करें।

​जो दुआएं और वजीफे मैंने ऊपर बताए हैं, वे मनगढ़ंत नहीं हैं। इनका सबूत क़ुरान और हदीस में मौजूद है।

  • क़ुरान (Surah Furqan, 25:74): यह एक और बेहतरीन दुआ है जो क़ुरान ने हमें सिखाई है: ​“रब-बना हब-लना मिन अज़-वाजिना वा ज़ुर्रिय-यातिना क़ुर-रता अअ-युनिंव वज-अलना लिल-मुत्तक़ीना इमामा।” तर्जुमा: “ऐ हमारे रब! हमें हमारी बीवियों और हमारी औलाद से आँखों की ठंडक अता फरमा और हमें परहेज़गारों का इमाम (Leader) बना।”
  • क़ुरान (Surah Qasas, 28:24): हज़रत मूसा (अ.) की दुआ, जिसका ज़िक्र ऊपर वजीफा 2 में किया गया है।
  • हदीस (Tirmidhi): नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: “दुआ इबादत का मग़ज़ (सार) है।”
  • हदीस (Ibn Majah): “जो शख्स इस्तिग़फार (Astaghfar) को लाज़िम पकड़ लेता है, अल्लाह उसके लिए हर तंगी से निकलने का रास्ता बना देता है और हर गम से निजात देता है, और उसे ऐसी जगह से रिज़्क़ देता है जहाँ से उसे गुमान भी नहीं होता।” (नेक रिश्ता भी रिज़्क़ का हिस्सा है)।

​यह तमाम वजीफे और दुआएं बड़े-बड़े उलमा और बुज़ुर्गान-ए-दीन के आज़माए हुए हैं और कई इस्लामिक किताबों में इनका ज़िक्र मिलता है। अगर आप शादी में आने वाली मुश्किल के वक़्त की दुआ तलाश रहे हैं, तो इस्तिग़फार और ऊपर दी गयी कुरआनी आयतें सबसे बेहतर हैं।

यह वजीफे और दुआएं रूहानी इलाज हैं। ये आपकी दुनियावी कोशिशों (जैसे रिश्ता ढूँढना, बायोडाटा देना) का बदल नहीं हैं। इन आमाल का मकसद अल्लाह से मदद मांगना और रुकावटों को दूर करना है। ​अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता कि आपके लिए क्या बेहतर है। हो सकता है किसी रिश्ते में देर होने में ही आपकी भलाई छुपी हो। इसलिए हमेशा अल्लाह की रज़ा में राज़ी रहें।

शादी के लिए सबसे मजबूत वजीफा जो जरूर काम करे, वो कौन सा है?

सबसे मजबूत वजीफा “नमाज़” और “सच्चे दिल से निकली दुआ” है। लेकिन अगर आप अमल पूछ रहे हैं, तो 40 दिन का “सूरह यासीन” का अमल (वजीफा 1) बहुत मजबूत और आज़माया हुआ है।

क्या कोई 7 दिन में असर दिखाने वाला वजीफा है?

देखिए, असर दिखाना अल्लाह के हाथ में है। वो चाहे तो एक पल में कर दे। लेकिन 7 दिन या 3 दिन वाले वजीफों में अक्सर लोगों का यकीन कमज़ोर पड़ जाता है। बेहतर है कि आप 21 दिन या 40 दिन की मुद्दत वाले अमल करें, इसमें सब्र और यकीन दोनों शामिल होते हैं।

रिश्ता न बनने पर सबसे कारगर दुआ कौन सी है?

हज़रत मूसा (अ.) की दुआ “रब्बी इन्नी लिमा…” (वजीफा 2) और सूरह फुरकान की आयत “रब-बना हब-लना…” रिश्ता न बनने की परेशानी के लिए सबसे कारगर दुआएं हैं।

बिना परेशानी के शादी की दुआ कैसे करें?

“इस्तिग़फार” (अस्तग़फिरुल्लाह) की कसरत करें। जब गुनाह माफ़ होते हैं, तो परेशानियाँ खुद-ब-खुद दूर हो जाती हैं और शादी में आसानी हो जाती है।

अल्हम्दुलिल्लाह, मेरे इल्म में कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने इन कुरआनी वजीफों (खासकर सूरह यासीन और “रब्बी इन्नी”) को पढ़ा और अल्लाह ने उनके लिए बेहतरीन रिश्तों के दरवाज़े खोल दिए।

  • ​एक बहन ने बताया कि वो 3 साल से परेशान थीं, 40 दिन सूरह यासीन का अमल करने के बाद अल्लाह ने उनकी दुआ कबूल की।
  • ​एक भाई ने “रब्बी इन्नी” वाली दुआ को हर नमाज़ के बाद पढ़ना शुरू किया, और 3 महीने के अंदर उनका रिश्ता एक नेक घराने में तय हो गया।

​अगर आप भी इस मज़मून से जुड़ा कोई सवाल पूछना चाहते हैं या अपना कोई तजुर्बा साझा करना चाहते हैं, तो नीचे कमेंट में ज़रूर लिखें।

​और अगर आपको यह जानकारी मुफीद (फायदेमंद) लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों और ज़रूरतमंदों के साथ Social Media पर Share ज़रूर करें। क्या पता आपके एक शेयर से किसी की जिंदगी संवर जाए।

इस पोस्ट में हमने शादी के लिए Quranic वजीफा और उसकी विधि पर बात की। लेकिन शादी सिर्फ शुरुआत है।

  • शादी के बाद की ज़िंदगी: शादी में खुशहाली बनी रहे, इसके लिए भी दुआ करते रहना चाहिए। [शादी में खुशहाली के लिए रोज की दुआ] के तौर पर “रब-बना हब-लना…” (सूरह फुरकान आयत 74) रोज़ाना पढ़ें।
  • नसीहत और दुआ: [शादी के लिए नसीहत और दुआ का महत्व] बहुत ज़्यादा है। नसीहत यह है कि सिर्फ वजीफे पर न बैठें, अपने अख़लाक़ (चरित्र) को भी अच्छा बनाएँ। एक नेक लड़का या लड़की बनने की कोशिश करें, अल्लाह आपको खुद नेक जोड़ा अता करेगा।
  • दीगर वजीफे: अगर आप शादी के अलावा दीगर मक़सद के लिए वजीफा तलाश रहे हैं, तो आप हमारा यह आर्टिकल जल्दी शादी का वजीफा इन क़ुरान भी पढ़ सकते हैं, जिसमें और भी तरीके बताए गए हैं।

आखिरी बात

​अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से मेरी यही दुआ है कि जो भी बहन-भाई या वालदैन अपने बच्चों के रिश्ते के लिए परेशान हैं, अल्लाह उन सबकी परेशानियों को दूर फरमाए।

​याद रखिए, आपकी दुआ ज़रूर कबूल होगी। हो सकता है वो उसी शक्ल में कबूल हो जो आप मांग रहे हैं, या हो सकता है अल्लाह आपको उससे बेहतर अता करे, या हो सकता है उस दुआ के बदले वो आपकी कोई बड़ी मुसीबत टाल दे। हर हाल में, अल्लाह पर भरोसा रखिए।

[शादी के लिए मजबूत वजीफा जो जरूर काम करे] वो सिर्फ और सिर्फ अल्लाह पर “यकीन-ए-कामिल” है।

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