तरावीह की दुआ हिंदी में | Taraweeh Ki Dua in Hindi

रमज़ान का महीना, रहमतों और बरकतों का महीना है. इस पाक महीने में अल्लाह ताला अपने बंदों पर खास मेहरबानी फरमाते हैं. रमज़ान में रोज़े रखने के साथ-साथ तरावीह की नमाज़ पढ़ना भी बहुत अहम माना जाता है. तरावीह, रमज़ान की रातों में पढ़ी जाने वाली एक खास नमाज़ है, जिसमें कुरान शरीफ का पाठ किया जाता है और अल्लाह से दुआएं मांगी जाती हैं.

अक्सर लोगों को तरावीह की नमाज़ के बाद पढ़ी जाने वाली दुआओं के बारे में जानकारी नहीं होती. इसलिए, आज हम आपको तरावीह की दुआ (Taraweeh ki dua in hindi) के बारे में विस्तार से बताएंगे, ताकि आप भी इस मुबारक मौके पर अल्लाह से अपनी मुरादें मांग सकें.

तरावीह का मतलब और अहमियत

तरावीह, अरबी भाषा का शब्द है जिसका मतलब है “आराम करना”. रमज़ान में हर रात इशा की नमाज़ के बाद 20 रकात नमाज़ पढ़ी जाती है, जिसे तरावीह कहते हैं. हर 4 रकात के बाद थोड़ा आराम किया जाता है, इसलिए इस नमाज़ को तरावीह का नाम दिया गया है. तरावीह पढ़ना सुन्नत-ए-मुअक्कदा है, यानी यह नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत है और इसे करना बहुत सवाब का काम है.

तरावीह की नमाज़ में पूरे कुरान शरीफ को सुना जाता है. हाफिज कुरान, तरावीह में कुरान पढ़ते हैं और बाकी लोग उन्हें सुनते हैं. इस तरह, रमज़ान के महीने में पूरे कुरान शरीफ को सुनने का मौका मिलता है.

Taraweeh ki dua ki Ahmiyat

तरावीह की नमाज़ के बाद दुआ करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. यह वक्त अल्लाह से मांगने का होता है. तरावीह के बाद दुआ करने से अल्लाह ताला खुश होते हैं और बंदों की दुआएं कुबूल करते हैं. रमज़ान के महीने में हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए तरावीह के बाद दुआ करने से बहुत सवाब मिलता है.

दुआ में हम अल्लाह से अपनी गलतियों की माफी मांगते हैं, अपनी परेशानियों से निजात पाने की दुआ करते हैं, और अपनी मुरादें पूरी करने की फरियाद करते हैं. दुआ एक ऐसा हथियार है जिससे हम अपनी किस्मत बदल सकते हैं.

तरावीह की दुआ कब और कैसे करें?

तरावीह की दुआ आमतौर पर हर 4 रकात के बाद (4 Rakat Bad Taraweeh ki Dua in hindi) की जाती है. लेकिन, आप चाहें तो पूरी तरावीह खत्म होने के बाद भी दुआ कर सकते हैं. दुआ करने का कोई खास तरीका नहीं है, आप अपनी जुबान में, अपनी भाषा में अल्लाह से दुआ कर सकते हैं. दिल से मांगी गई दुआ अल्लाह तक जरूर पहुंचती है.

दुआ करते वक्त अदब का ख्याल रखना चाहिए. पाक-साफ होकर, किबला की तरफ मुंह करके, हाथों को उठाकर दुआ मांगनी चाहिए. दुआ की शुरुआत में अल्लाह की तारीफ करनी चाहिए और नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर दुरूद भेजना चाहिए.

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Taraweeh me padhi jane wali dua in hindi

वैसे तो आप अपनी मर्ज़ी से कोई भी दुआ कर सकते हैं, लेकिन कुछ मशहूर दुआएं हैं जो तरावीह में अक्सर पढ़ी जाती हैं. इनमें से कुछ दुआएं इस प्रकार हैं:

  • सुब्हाना ज़िल मुल्कि वल मलाकूत, सुब्हाना ज़िल इज्ज़ति वल अज़मति वल हैबति वल कुदरति वल किब्रियाई वल जबरूत, सुब्हानल मालिकिल हैय्यिल्लज़ी ला यनामु वला यमुत, सुब्बुहुन कुद्दुसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर रूह, अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन्नार या मुजीरू, या मुजीरू, या मुजीरू.

यह दुआ तरावीह में हर 4 रकात के बाद पढ़ी जाती है. इसका मतलब है: “पाक है वह जो बादशाहत और फ़रिश्तों का मालिक है, पाक है वह जो इज्जत, अज़मत, हैबत, कुदरत, बड़ाई और दबदबे वाला है, पाक है वह मालिक जो हमेशा ज़िंदा रहने वाला है, न उसे नींद आती है और न ही उसे मौत आती है, वह निहायत पाक और मुक़द्दस है, वह हमारा रब है और फ़रिश्तों और रूह का रब है, ऐ अल्लाह हमें आग से बचा, ऐ बचाने वाले, ऐ बचाने वाले, ऐ बचाने वाले.”

  • अल्लाहुम्मा इन्ना नस्अलुका जन्नता व नाऊज़ुबिका मिनन्नार.

यह एक आम दुआ है जो अक्सर तरावीह के बाद पढ़ी जाती है. इसका मतलब है: “ऐ अल्लाह, हम तुझसे जन्नत मांगते हैं और दोज़ख से तेरी पनाह मांगते हैं.”

  • अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफवा फा’फू अन्नी.

यह दुआ शब-ए-कद्र में पढ़ने की खास हिदायत है, लेकिन इसे तरावीह में भी पढ़ा जा सकता है. इसका मतलब है: “ऐ अल्लाह, तू माफ करने वाला है, माफ करने को पसंद करता है, तो मुझे भी माफ कर दे.”

दुआओं के अलावा कुछ और बातें जो तरावीह में ध्यान रखनी चाहिए:

  • तरावीह की नमाज़ को इशा की नमाज़ के बाद ही पढ़ें.
  • तरावीह की नमाज़ जमात के साथ पढ़ना बेहतर है.
  • तरावीह में कुरान शरीफ को सही तरीके से सुनना चाहिए.
  • तरावीह के दौरान दुनियावी बातों से बचना चाहिए.
  • तरावीह की नमाज़ को खुशी और शौक से पढ़ना चाहिए.
  • कोशिश करें कि तरावीह के बाद कुछ वक्त इबादत में गुजारें.

तरावीह की दुआ (Taraweeh dua in hindi) पढ़ने के फायदे:

  • अल्लाह ताला खुश होते हैं.
  • दुआएं कुबूल होती हैं.
  • गुनाह माफ होते हैं.
  • दिल को सुकून मिलता है.
  • आत्मा को शांति मिलती है.
  • जन्नत में दाखिला नसीब होता है.

Conclusion:

तरावीह की नमाज़ रमज़ान का एक खास तोहफा है. हमें इस मुबारक मौके का फायदा उठाना चाहिए और तरावीह की नमाज़ को पाबंदी से पढ़ना चाहिए. तरावीह के बाद दुआ (Taraweeh ki dua in hindi) करने से अल्लाह ताला खुश होते हैं और हमारी मुरादें पूरी करते हैं.

रमज़ान का महीना हमें अपनी गलतियों से तौबा करने और अल्लाह के करीब आने का मौका देता है. हमें इस महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करनी चाहिए और अल्लाह से दुआएं मांगनी चाहिए.

उम्मीद है कि आपको तरावीह की दुआ (Taraweeh ki dua in hindi) के बारे में यह जानकारी पसंद आई होगी. अल्लाह ताला हम सबको रमज़ान की बरकतों से फायदा उठाने की तौफीक अता फरमाए. आमीन.

यह भी याद रखें कि रमज़ान में ज़रूरतमंदों की मदद करना भी बहुत सवाब का काम है. ज़कात और सदका देकर हम दूसरों की मदद कर सकते हैं और अल्लाह की रज़ा हासिल कर सकते हैं.

अल्लाह हम सबको नेक काम करने की तौफीक दे और हमारे गुनाहों को माफ करे. आमीन.

अगर आपके मन में तरावीह से जुड़ा कोई सवाल है, तो आप कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं. हम आपकी मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे.

कुछ लोग 4 रकात बाद तरावीह की दुआ (4 Rakat Bad Taraweeh ki Dua in hindi) को पढ़ना ज़रूरी समझते हैं, जबकि कुछ लोग पूरी तरावीह के बाद एक साथ दुआ करते हैं. दोनों ही तरीके सही हैं. आप अपनी सहूलियत के हिसाब से कोई भी तरीका अपना सकते हैं.

यह भी ध्यान रखें कि दुआ दिल से होनी चाहिए. सिर्फ ज़ुबानी दुआ पढ़ने से कोई फायदा नहीं होता. दुआ करते वक्त अपने दिल को अल्लाह की तरफ लगाएं और यकीन रखें कि अल्लाह आपकी दुआ जरूर सुनेगा.

रमज़ान करीम!

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